बॉलीवुड अभिनेता जिन्होंने स्क्रीन पर महात्मा गाँधी के रोल को यादगार बना दिया

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मोहनदास करमचंद गांधी के चरित्र को स्क्रीन पर पेश करना कठिन काम है। एक बैरिस्टर के रूप में,गांधी को एक पिता के रूप में और एक विवादास्पद राजनीतिक नेता के रूप बड़ी स्क्रीन पर चेहरे के परिवर्तन के साथ-साथ हाव भाव देना आसान नही है लेकिन कुछ ऐसे अभिनेता है जिन्होंने इस चुनौती पूर्ण भूमिका को सफलतापुर्वंक निभाया है। आइयें जानतें बॉलीवुड वह कौन से अभिनेता है जिन्होंने बापू की भूमिका को स्क्रीन पर अमर बना दिया है।



सर बेन किंग्सले गांधी फिल्म में : जब भी गाँधी की भूमिका को स्क्रीन पर निभाने की बात होती है तो सबसे पहले नाम बेन किंग्सले का आता है। रिचर्ड एटनबरो के ब्रिटिश-इंडियन बायोपिक गाँधी फिल्म में उनकी बेहतरीन एक्टिंग के लिए ऑस्कर दिया गया था। उन्होंने महात्मा गांधी के राजनीतिक, व्यक्तिगत हत्या और सामाजिक पहलुओं को आत्मविश्वास के साथ स्क्रीन पर पेश किया था।



रजित कपूर- द मेकिंग ऑफ़ द महात्मा- श्याम बेनेगल की 1996 में रिलीज हुई यह फिल्म गांधी के जीवन और दक्षिण अफ्रीका में रहने के बारे में थी। इस भूमिका में रजित कपूर ने क बैरिस्टर के रूप में अफ्रीका की यात्रा की थी और भारतीयों की गरिमा के लिए लड़ाई लड़ी थी। भारतीयों की गरिमा के लिए लड़ाई,ट्रेन डिब्बे में से निकाला जाने और अदालत में अपनी पगड़ी ले जाने वाले युवा दृश्यों में युवा गांधी को बेहतरीन तरीके से पेश किया था। रजित कपूर ने क्रोध, चोट और महात्मा बनने की शुरुआत को स्क्रीन पर सुपर तरीके से पेश किया था। सत्याग्रह, और युवा रूप में उनकी बॉडी लैंग्वेज काफी बेहतरीन थी।



मोहन गोखले - डॉ बाबासाहेब अंबेडकर- वैसे तो यह फिल्म अम्बेडकर पर केंद्रित थी लेकिन 2000 में रिलीज हुई इस फिल्म में मोहन ने साहसपूर्ण गाँधी की भूमिका की थी। इस फिल्म में गांधी के नकारात्मक भाग को प्रकाश में लाया गया था। इस फिल्म में मोहन ने महात्मा के उपवास वाले सीन को यादगार बना दिया था।



दिलीप प्रभावळकर : लगे रहो मुन्नाभाई : लगे रहो मुन्नाभाई फिल्म में दिलीप प्रभावळकर ने गांधीगिरी फैशनेबल शब्द को खूब फेमस किया। इस फिल्म में वह वास्तविकता में गांधी लगे थे और उनके गांधीगिरी के अंदाज को दर्शकों ने खूब प्यार दिया है। जब इस अभिनेता को राष्ट्रीय पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का अवार्ड मिला तो इसमें किसी को भी आश्चर्य नही हुआ था।



दर्शन जारीवाला गांधी माय फादर : फिल्म के नाम से ही पता चलता है कि यह फिल्म बेटे, हरिलाल और पिता गांधी के संबंधों के बारे में थी। 2007 तक दर्शकों ने गांधी को एक राजनीतिक आकृति के रूप में देखा था लेकिन इस फिल्म में जरीवाला ने उनके पारिवारिक व्यक्ति के रूप में पेश करने का सफल प्रयास किया था। फिल्म में नायक ने नावपूर्ण रिश्ते को बहुत अच्छी तरह से संभाला था। इस फिल्म से दर्शन ने राष्ट्रीय पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता की ट्रॉफी जीती थी।



सुरेंद्र राजन द लेजेंड ऑफ़ भगत सिंह, वीर सावरकर, और नेताजी सुभाष चंद्र बोस : इन तीनों फिल्मों में सुरेंद्र राजन ने गाँधी की भूमिका निभाई थी। इन फिल्मों में उन्होंने तंत्रता सेनानियों के साथ टकराव के दृश्यों में खुद को बहुत ही बेहतरीन रूप से स्क्रीन पर पेश किया है। उन्होंने अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन को हर फिल्म में जारी रखा है।



नसीरुद्दीन शाह हे राम : नसीरुद्दीन शाह की भूमिका ने वह न्याय तो नही किया था लेकिन फिर भी उनका नाम लिस्ट में शामिल किया गया है क्योकि उन्होंने कमल हासन की फिल्म में गांधी जी की भूमिका निभाई थी। उनकी शरीरिक भाषा और अभिव्यक्ति का उच्चारण एकदम सही था लेकिन वह इस रोल को अमर बनाने से चूक गए थे।

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