रेबीज से जुड़े कुछ अनसुने तथ्य

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समूचे विश्व में अगर तलाश की जाएं की किस जानवर को सबसे अधिक प्यार और दुलार मिलता है तो शायद कुत्तों का नाम सर्वप्रथम आयेंगा। जिन कुत्तों को प्यार मिलता है वह तो चहेते होते है इसलिए उनका पूर्ण ख्याल रखा जाता है लेकिन जिन कुत्तों की देखभाल नही हो पाती है उनमें कई तरह के रोग हो जाते है और उसकी खामियाजा सम्पूर्ण मानव जाति को भुगतना पड़ता है।



कुत्तों के काटने की वजह से रेबिज नामक रोग हो जाता है। आपको यह जानकर ताजुज्ब होगा की अभी तक रेबिज का इलाज नही मिला है केवल टीकाकरण एक मात्र रास्ता है जिससे सौ फीसदी रेबीज को रोका को जा सकता है।

कुत्ते के दांतों से उत्पन्न होने वाले घातक वायरस रेबीज के कारण हर साल भारत में लगभग 20565 लोग मर जाते है जो विश्व मौतों का 36 फीसदी है। कुत्तों से होने वाले रेबीज की वजह से विश्व पर हर वर्ष 124 अरब डॉलर का बोझ पड़ता है लेकिन 6-8 अरब डॉलर के टीकाकरणं का प्रयोग करके इस जानलेवा वायरस से निपटा जा सकता है।



आज रेबीज नामक खतरनाक वायरस के प्रति लोगो को जागरूक बनाने के लिए 28 सितम्बर के दिन को वर्ल्ड रेबीज डे के रूप में मनाया जाता है। आपको इस बात की जानकारी भी दे दे कि कुत्तों के दांतों से उत्पन्न इस वायरस पर काबू पाने के लिए लुई पेस्टर और एमिल रु ने 6 जुलाई 1885 को पहली बार रेबीज टीके का इस्तेमाल कामयाबी के साथ किया था।