अमरीका के 2 बम और जपान के हिरोशिमा तथा नागासाकी के बीच जुड़े फैक्ट्स की जानकारी

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6 अगस्त 1945 को विश्व में एक ऐसी घटना घटी जिसने सम्पूर्ण विश्व को दहला कर रख दिया और अब सम्पूर्ण विश्व इसके ना दोहराए जाने की कामना करता है। अमरीकी राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन ने 6 अगस्त 1945 को इतिहास में एक ऐसी इबारत लिख दी जिसने जापान के हिरोशिमा शहर को शमशान और मृत लाशों का शहर बना दिया था और इसी के साथ जापान दुनिया का एक मात्र ऐसा बदनसीब देश बन गया जिसने परमाणु हमले को सहन किया है।





अमरीका के तत्कालीन राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन से परमाणु बम गिराए जाने की अनुमति मिलने के बाद रात के बाद की पहली सुबह 2 बजकर 45 मिनट पर अमरीकी वायुसेना की तरफ से बी-29 'एनोला गे' ने 'लिटिल बॉय नामक परमाणु बम के साथ जापान के हिरोशिमा की तरफ अपनी यात्रा शुरू कर दी थी।


कहा जाता है कि 'लिटिल बॉय नामक परमाणु बम को जब विमान में लेस किया था तब इसमे बारूद नही था और बाद में मॉरिस जैप्सन ने चार बड़े बैग से बारूद भर कर और फिर प्लग लगा कर इस बम को सक्रिय कर दिया था।





परमाणु बम से सक्रिय एनोला गे' के पायलट कर्नल पॉल डब्लू तिब्बेत्स लेकर पश्चिम दिशा की तरफ मौजूद जापान के हिरोशिमा की तरफ तेजी से वो करने की दिशा में बढने लगे थे जिसकी कल्पना भी उस वक़्त नही की जा सकती थी।


साफ़ आसमान रोज़मर्रा के कामों में लगे हिरोशिमा के लोगो के ऊपर 9700 पाउंड (4400 किलोग्राम) वजन ,10 फुट लंबाई और लगभग 28 इच व्यास वाले परमाणु 'लिटिल बॉय बम को सवा आठ बजे कर्नल पॉल डब्लू तिब्बेत्स ने छोड़ा था।





छह अगस्त 1945 के दिन हिरोशिमा शहर में मौजूद लोग या तो मारे गये थे या फिर रेडिएशन का शिकार हो गये जिनका असर आज भी उनके पीढ़ियों पर अपंगता और बीमारी के रूप में नजर आता है। रेडिएशन का शिकार हुए लोगो को हिबाकुशा कहा जाता है और इनकी संख्या 2 लाख के आसपास है। सामाजिक और आर्थिक रूप से जापानी सरकारी इनको मदद आज भी देती है।





हिरोशिमा शहर की उस समय की कुल आबादी लगभग तीन लाख 50 हज़ार थी जिसमे से एक लाख 40 हज़ार लोग मारे गए थे और लगभग 60 प्रतिशत इमारतें गिर कर नष्ट हो गयी थी। इस विध्वसंकारी बम के गिरने के बाद हिरोशिमा में लाशें ही लाशें नजर आ रही थी। जापान के आधिकारिक पुष्टि की बात करें तो उसने इस हमले की वजह से मारे गये लोगो कि सख्यां एक लाख 18 हज़ार 661 ही मानता है।





अमीरका ने जापान के हिरोशिमा हसते-बसते शहर को उजाड़ और वीरान इसलिए बनाया था क्योकि वह एक बंदरगाह वाला शहर था जो जापानी सेना को राशन पहुचाने का केंद्र था और जापानी सेना अपना संचार तंत्र भी यही से ओपरेट करता था।


20 हज़ार टन टीएनटी की क्षमता और ब्रहमांड की शक्ति समेटने वाले इस परमाणु बम को बनाने में लगभग दो अरब डॉलर का ख़र्च आया था।


कोकुरा पर हमले से जुडी जानकारी





आमरीका ने इसके बाद 9 अगस्त को नौ बजकर पचास मिनट पर 31,000 फीट की ऊँचाई बी-29 से  4050 किलो तरबूज़ आकार वाले बम को औद्योगिक नगर कोकुरा में गिरा कर तबाही के मंजर को एक बार फिर से दोहराया था। फ़ैट मैन नामक इस बम की वजह से जपान के गोला-बारूद बनाने वाली फैक्टरियाँ तबाह हो गयी थी।





नागासाकी पर परमाणु हमले से जुड़े फैक्ट्स


6 और 9 अगस्त के बाद जापान को एक बार फिर से दुःख,दर्द,चीखों बर्बादी और तबाही का सामना 12 अगस्त को करना पड़ा जब अमरीका ने नागासाकी को अपना निशाना बनाया।





12 अगस्त को हिरोशिमा में हुई तबाही का मंजर नागासाकी में दोहराने के लिए अमरीका के विमान ने सुबह नौ बजे उड़ान भरी और जब वह जापान पंहुचा तो वह मौसम में बादल थे। 11 बजकर 2 मिनट पर 52 सेकेण्ड तक नीचे गिरने के बाद पृथ्वी तल से 500 फ़ुट की उँचाई पर मशरुम जैसी आकर वाले बम से जापान के नागासाकी शहर पर दूसरा परमाणु बम गिरा जिसमे 70000 लोग मारे गये थे और लगभग इतने ही लोग इसके सक्रमण का शिकार हुए थे।





परमाणु बम से इतनी मौत हो जाने के बाद अमरीकी राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन ने दुःख जताने की जगह रात को यें ऐलान करते हुए नजर आयें कि जापानियों को अब ज्ञात हो गया होगा कि परमाणु बम क्या-क्या कर सकता है।


इन दो परमाणु हमले के छ: दिन बाद जापान के युद्ध मंत्री और सेना के अधिकारी के खिलाफ जाते हुए प्रधानमंत्री बारोन कांतारो सुज़ुकी ने दोस्त देशो के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।





इन विस्फोटो के बाद से ही दुनिया में परमाणु बम हासिल करने की एक होड़ लग गयी थी जो आज भी जारी है।