12 साल बाद आने वाले धार्मिक मेले कुम्भ से जुडी कुछ अनसुनी बातें

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भारत का कुम्भ मेला धार्मिक,आस्था और गंगा स्नान का वह ऐतिहासिक मेला है जिसकी धूम भारत में नही पृथ्वी से दूर अन्तरिक्ष से भी दिखाई देती है। सभी साधू-संतों  का दर्शन एक ही घाट पर कराने वाले कुम्भ मेले का आयोजन एक ही स्थान पर 12 साल बाद होता है और हर छह साल बाद अर्धकुम्भ मेले का आयोजन हरिद्वार और इलाहाबाद में किया जाता है।




आत्मा और मन को पवित्र करने वाले इस भारतीय मेले का सम्बन्ध हिन्दू धर्म से है पर दुनिया में आदमियों की समस्त भीड़ इस पर्व के आयोजन और महत्व का आलम यें है कि इसे हिन्दू धर्म के साथ-साथ भारत और विदेशी यात्री भी शामिल होते है। अमृत स्नान पाप धोने और मोक्ष देने वाले इस मेले के बारे में ऐतिहासिक और धार्मिक काथाएं है जिनके बारे में लगभग सभी भारतीय जानतें है इस उम्मीद में हम इसके विस्तार में नही जाते है और इस लेख से हम सिर्फ उन तथ्यों को आपके सामने रख रहे है जिसे बहुत कम लोग ही जानते होंगे।


  • कुम्भ मेला 2000 वर्षो से भी अधिक पुराना है लेकिन इसके लिखित दतावेज 629 -645 ईस्वी में भारत आयें चीनी यात्री हुआन त्सांग द्वारा रिकॉर्ड मिलता है।


  • भारतीय संस्कृति की वैभव गाथा कहने वाले कुंभ का शुभारम्भ मकर संक्रांति पर्व से होता है पर वास्तविक में इसकी इस त्रिवेणी स्नान की गणना का अनुमान सूर्य और चन्द्रमा का वृश्चिक राशी में और वृहस्पति का मेष राशी में प्रवेश करने को ही कुम्भ योग कहा जाता है।





  • रात्रि के तीसरे पहर में साधू संत के शाही स्नान के साथ ही कुम्भ स्नान की शुरुआत हो जाती है। इसे शाही स्नान इसलिए कहा जाता है क्योकि पहले राजा महाराज स्नान करते थे और साधू संत उनके साथ चलते है पर वक़्त के साथ इसमे बदलाव आया और वह राजाओं महराजाओ की परम्परा अब साधू संत ही निभाते है। इसे मेले में साधुओं और आम जनता के स्नान की अलग-अलग व्यवस्था होती है।




  • कुम्भ शाही स्नान में नागा साधु हर हर महादेव गगनभेदी नारों के साथ शामिल होते है और इन नागाओं को देखने विश्व भर से लोग इस मेले में आते है। नग्न रहने वाले नागा साधुओं के बारे में प्रचलित है कि औरत के सोलह श्रृंगार होते है तो भस्म से लिपटे नगाओं के सत्रह श्रृंगार होते है। यह अपनी जटाओं से लेकर पैरों तक रुद्राक्ष त्रिशूल डमरू और फूलमाला आदि से सुसज्जित होते है।




  • वर्तमान में कुम्भ में 14 अखाड़े शामिल होते है जिसमे से 11 भगवान शिव के होते है जिन्हें सन्यासी कहा जाता है और 3 भगवान विष्णु के होते है जिन्हें वैरागी कहा जाता है। धार्मिक स्नान में शामिल इन सभी अखाड़ों में जुना अखाडा सबसे बड़ा अखाडा है क्योकि इसमे शामिल साधू संतों की संख्या अन्य अखाड़ों से कही अधिक है।


  • इलाहाबाद हरिद्वार, उज्जैन, नासिक में मनाएं जाने वाले इस मेले को दुनिया का सबसे बड़ा मेला कहा जाता है क्योकि इसमें हर साल पहले की अपेक्षा कई गुना आम लोगो का रेला शामिल होता है और वर्तमान में इन तीर्थ यात्री भक्तो की गिनती करोड़ो में होती है।


  • 18 अप्रैल 2010 को अमेरिका के एक शो ने पृथ्वी पर सबसे बड़ा तीर्थ यात्रा पर एक व्यापक कवरेज दिया था और इस बात को प्रमाणित कर दिया था यह दुनिया का सबसे बड़ा मेला है।






  • 2013 में हुए महाकुम्भ में 10 करोड़ लोग शामिल हुए थे जिनकी तस्वीर धरती के बाहर अन्तरिक्ष से भी नजर आई थी और इसरो ने अन्तरिक्ष से इसकी तस्वीर लेकर प्रसारित भी की थी।


  • कुम्भ आत्मा पवित्र करने वाला सिर्फ एक धार्मिक मेला नही है यह आर्थिक रूप से भी भारत में अहम भूमिया निभाता है। एक अनुमान के अनुसार कुम्भ के आयोजन से लाखों लोगो को रोजगार मिलता है और सैलानियों के आने से विदेशी मुद्रा में भी वृद्धि होती है।