भारत के रक्षा बलों में अदृश्य रहने वाली रॉ से जुड़े कुछ अहम फैक्ट्स जो हर भारतीय को मालूम होनी चाहिए

Views:70100


भारत की एक पूरी पीढ़ी के मन में विभिन्न भारतियों जासूसों को लेकर और पूरी दुनिया में उनके द्वारा किए काम को लेकर कई कथाएँ, किंवदंतियों और अफवाहें प्रचलित है। आज पूरी दुनिया में रॉ और उनके एजेंट कई साज़िश स्रोत का खुलासा करते हुए ना सिर्फ देश को सुरक्षित किया है अपितु देश की सुरक्षा तरक्की में भी कई योगदान दे चुके है । रिसर्च ऐंड एनालिसिस विंग 1968 के बाद से भारतीय खुफिया और सामरिक संचालन की रीढ़ बन गयी है तो आइये आज जानते है रॉ से जुड़े कुछ अहम फैक्ट्स के बारें में जिसके बारें में निश्चित रूप से हर भारतीय को पता होना चाहिए ।

  • रॉ भारत-चीन युद्ध के जवाब में सितंबर माह की 21 तारीख साल  1968 में स्थापित की गयी थी । 1962 में भारत-चीन संघर्ष और 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान आईबी की हुई हुई विफलताओं के बाद इंदिरा गांधी सरकार ने अतिवादी कदम उठाते हुए विदेशी खुफिया जानकारी जुटाने के लिए रॉ को जन्म दिया था।




  • इंदिरा गाँधी सरकार ने रामेश्वर नाथ काव को पहले रॉ का पहला डायरेक्टर नियुक्त किया था । रामेश्वर नाथ काव रॉ मास्टरमाइंड के रूप में काफी प्रतिष्ठा अर्जित की थी । बांग्लादेश की स्वतंत्रता और सिक्किम   के भारतीय राज्य के विलय में रॉ ने अहम भूमिका निभाई थी । अपने ने नौ साल के नेतृत्व के तहत वह पहले रॉ डायरेक्टर थे जो सीधे तौर पर शामिल किया गए थे।




  • 1971 में इंडियन एयरलाइंस के विमान अपहरण गंगा की वापसी रॉ द्वारा एक रणनीतिक कदम था और उसके बाद भारत ने पाकिस्तानी विमान से उड़ानों पर प्रतिबंध लगाने की जवाबी कार्रवाई की थी । जिसका महत्वपूर्ण प्रभाव 1971 के युद्ध के दौरान पूर्वी पाकिस्तान में पाकिस्तानी सेना द्वारा चल रहे सेना आंदोलन पर पड़ा था । दरअसल उस वक्त हुआ यह था की अल-फतह जो एक पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादी संगठन था उसने अपने सदस्यों को लेकर उस इंडियन एयरलाइंस विमान को अपहरण करने की योजना बनाई थी जिसे इंदिरा गांधी के बेटे राजीव गांधी द्वारा नियंत्रित किया जाना था और उसका प्रशिक्षण पाकिस्तान सरकार की ओर से दिया गया था लेकिन बाद में हाशिम कुरैशी को बीएसएफ द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया।

रॉ ने तब राजी कुरैशी को प्लास्टिक का खिलौना पिस्तौल और ग्रेनेड खिलौना देकर मिशन पर साथ ले जाने को कहा और उड़ान के लिए पुराने डिकमीशन विमान गंगा को बुलाया गया और मिशन को पूरा करने के बाद भारतीय एयरलाइन अपहरण में भारत सरकार द्वारा पाकिस्तानी सरकार की भागीदारी साबित कर दी गयी।



  • रॉ में भर्ती हुए गुप्त एजेंटों में 'ब्लैक टाइगर सबसे सफल एजेंटों में से एक था । स्वर्गीय रविंद्र कौशिक उर्फ ब्लैक टाइगर का जन्म 11 अप्रैल 1952 राजस्थान के श्री गंगानगर के थिएटर कलाकार के घर हुआ था । रॉ द्वारा भर्ती के बाद उनको 1975 में पाकिस्तानी सेना में घुसपैठ करने के लिए पाकिस्तान भेजा गया था ।


व्यापक प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद टॉप गुप्त मिशन पर निकले कौशिक नबी अहमद शाकिर बन गए और पाकिस्तानी सेना के भीतर मेजर के पद तक पहुंचे । कौशिक उर्फ़ अहमद शाकिर भारतीय रक्षा बलों के लिए बहुमूल्य सैन्य खुफिया जानकारियां 1979 और 1983 के बीच देते रहे इस भारतीय जासूस ने अपने काम से 'ब्लैक टाइगर' की ख्याति अर्जित की थी ।

अंत में जब वह एक लो लेवल ऑपरेटिव इनयात मसीह इंडियन फ़ोर्स को भेज रहे थे तब वह पकड़े गए । कौशिक को लगभग दो साल के लिए कैद किया गया और अत्याचारी पाकिस्तानी सेना द्वारा 1985 में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गयी । साल 1999 में मुल्तान की नई सेंट्रल जेल में तपेदिक और दिल की बीमारी से रविंद्र कौशिक ने दम तोड़ दिया था । बॉलीवुड फिल्म एक था टाइगर उनकी कहानी पर आधारित थी।



  • रॉ एक स्वतंत्र शाखा है । वास्तव में रॉ एक एजेंसी नहीं है लेकिन तकनीकी रूप से एक शाखा है। इसका मतलब यह है की यह खुफिया सेवा किसी भी सरकारी निकाय के प्रति जवाबदेह नहीं है , यह सीधे सीधे प्रधानमंत्री और संयुक्त खुफिया समिति के सम्पर्क में रहती है और इसको आरटीआई एक्ट से भी बाहर रखा गया है । रॉ के प्रमुख के कैबिनेट सचिवालय में सचिव नामित किया गया है और कैबिनेट सचिव प्रशासनिक आधार पर प्रधानमंत्री को रिपोर्ट करते है




  • लाफिंग बुद्धा ऑपरेशन को गुप्त रखने की जिम्मेदारी रॉ एजेंसी के पास ही थी । इस मिशन से रॉ ने साबित कर दिया की वह देश के लिए कितनी महत्वपूर्ण एजेंसी है । भारत के पहले परमाणु हथियारों का परीक्षण राजस्थान के पोखरण रेंज में आयोजित किया गया था । 18 मई, 1974 को जो हुआ उसके बाद भारत सरकार ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया की शांतिपूर्ण परमाणु विस्फोट वास्तव में त्वरित परमाणु कार्यक्रम था और जिसके पूर्ण रूप से गुप्त रखने के पीछे रॉ अधिकारी शामिल थे


वास्तव में लाफिंग बुद्धा ऑपरेशन को गोपनीयता के अंतर्गत रखा गया था क्योकि भारतीय परमाणु हथियारों के परीक्षण पर अमेरिका और चीन के खुफिया रडार लगे हुए थे लेकिन सभी अंतरराष्ट्रीय परमाणु आंदोलन और गतिविधि पर नजर रखने वाले ये देश हथियारों के विकास की इस दुनिया में आने से भारत को नही रोक सके और भारत के इस परमाणु रहस्य के बारें में उस समय किसी भी देश को कोई जानकारी नही हुई थी, इस तरह रॉ का यह मिशन भी सफल रहा था


सीआईए की तर्ज पर आज भारतियों के पास भी एक सफल एजेंसी है । जो भारतीयों के लिए हर पल मुस्तैद और जोखिम लेकर मिशन पूर्ण करने के लिए तत्पर रहती है ।