अरबी अंकों का आविष्कार वास्तव में भारत में किया गया

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अरबी अंक जिनको आज हम अंग्रेजी में अधिक उपयोग करना पसंद करते है उसके अविष्कार के बारें में जब आपको मालूम पड़ेगा तो आप हैरान रह जायेंगे। : 0, 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, यह अंक प्रणाली जिसे हिंदू-अरबी भी कहा जाता है वास्तव में उसका अविष्कार भारत में ही हुआ है।



दुनिया में संख्या का प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व करने वाली यह आम अंक प्रणाली 500 ईसा में भारतीय उपमहाद्वीप में प्राचीन गणितज्ञों के द्वारा विकसित किया गया था जिसे बाद में फारसी और बगदाद में अरब गणितज्ञों द्वारा अपनाया गया। अरबों ने पश्चिमी क्षेत्र में अरबी अक्षरों के नाम से इसे से विकसित किया, दूर पश्चिम अरबों को अतरिक्त इसे उत्तरी अफ्रीका में भी विकसित किया गया।



इस अंक प्राणाली के दुनिया भर में प्रसार करने यूरोपीय व्यापार, किताबें और उपनिवेशवादों को जाता है जिनके माध्यम से दुनिया भर में इसे फैला दिया गया। आज इन अंको को हिंदू-अरबी कहा जाता है और साथ भारत में देवनगरी अंक प्रणाली है जिसे आम बोलचाल में हिंदी नंबर कहा जाता है।