केचप के इतिहास से जुड़े कुछ अनजाने फैक्ट्स

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हम अपनी रोजाना जिन्दगी में केचप का प्रयोग करते है आखिर करें भी क्यों नही केचप समोसे पकोड़े बर्गर और नुडल लगभग सभी तरह के फ़ास्ट फ़ूड के स्वाद में चार चाँद जो लगा देता है। हम प्रतिदिन टोमेटो केचप का प्रयोग तो करते है पर इसके इतिहास के बारे हमें कोई जानकारी नही होती है।


चीन लोगो पर भरोसा किया जाए तो चीन के लोगो के अनुसार केचप के इतिहास का विवरण लगभग 17वीं शताब्दी से मिलना आरंभ हो जाता है। चीन में कुछ कहानियाँ मिलती है जिसमे कहा जाता है मसालेदार मछली के साथ कोई-चिाप नाम का पदार्थ प्रयोग में लाया जाता था पर मलय खोजकर्ता पर यकीन करे तो टेबल सॉस को 18वीं सदी में मलेशिया और सिंगापुर में इसे बनाया था और केकेप था जिसके बाद में अंग्रेजी भाषा में केचप कह कर विकसित किया गया।


जबकि अग्रेजी शोध के अनुसारण केचप शब्द का इस्तेमाल 1690 में उत्तरी अमेरिका की डिक्शनरी में किया जा चूका है।






यूनाइटेड किंगडम में 18वीं सदी में व्यंजनों के केचप का इस्तेमाल शुरू हो गया था और उसके बाद अमेरिकी किताबों में भी इसके बारे में काफी छापा जाता रहा है। आप को जानकर हैरानी होगी की केचप बनाने के लिए सबसे पहले मशरूम का प्रयोग किया जाता रहा है। टमाटर से बने केचप का प्रयोग काफी देर बाद शुरू हुआ था।


टोमेटो केचप को सबसे पहले सैंडी एडिसन ने बनाया था जिसे अमेरिकन कुकबुक में जगह मिली और बाद में लोगो ने भी इसे काफी पसंद किया। एफ एंड जे हाइन्ज़ ने 1876 हाइन्ज़ टमाटर केचप ने नाम विज्ञापन के जरिये मार्किट में खुले आम बिक्री के लिए पहली बार कदम रखा था।  


सबसे पहले कागज के कप में पंप से केचप दिया जाता था पर 2010 में हेंज ने इस तरीके को दूर कर पैकेट वाले केचप का प्रयोग किया इस तरीके का इस्तेमाल आजकल काफी लोगप्रिय है। इसके साथ साथ गुलाबी, बैंगनी, हरे जैसे रंग बिरंगे केचप का प्रयोग 2000 हेंज ईज़ी ने ही किया था।