राजनीति के रियल किंगमेकर के. कामराज के जीवनकाल से जुड़ी बाते शायद आप ना जानतें होंगे

Views:110663


आज भारत की सभी राजनितिक पार्टियाँ मुफ्त शिक्षा और बेहतर मिड-डे-मील देने का वादा हर चुनावी घोषणा में करती है लेकिन क्या आप जानतें है कि आजाद भारत में मुफ्त शिक्षा मिड-डे-मील और स्कूल में यूनिफार्म देने की योजना की पहल किसने की थी अगर आप नही जानतें तो हम आपको बताते है।





मुफ्त शिक्षा और बेहतर मिड-डे-मील, स्कूल में यूनिफार्म देने का काम अपने शासनकाल में तमिलनाडु के. कामराज ने किया था। के .कामराज को भारतीय राजनीति किंगमेकर के नाम से जाना जाता था क्योकि उन्होंने देश को दो दिग्गज प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और इंदिरा गाँधी दिए जिन्होंने अपनी छाप समूचे विश्व पर छोड़ी।





के. कामराज भारत के पहले प्रधानमंत्री नेहरू के काफी करीब थे उन्होंने अपना जीवन बिलकुल निचले स्तर से शुरू किया था। नाडर जाति में 15 जुलाई 1903 को तमिलनाडु के विरुधुनगर के मदुरै में पैदा हुए कुमारास्वामी कामराज ने अपना राजनीतिक करियर जालियांवाले बाग़ हत्याकांड के बाद शुरू किया।





जलियांवाले बाग़ हत्याकांड के बाद के. कामराज भारत की आजादी की चल रही लड़ाई में कूद पड़े। के. कामराज अपने पूरे जीवनकाल में 6 बार कैद किए गये और उन्होंने 3000 दिन जेल में व्यतीत किए। 16 वर्ष की उम्र में वे कांग्रेस में शामिल के. कामराज भारत देश की आजादी के बाद सन 1954 में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और बाद में कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष पद भी पर काबिज हुए।





भारत के रियल किंगमेकर के. कामराज का निधन 2 अक्टूबर 1975 को हुआ और मृत्यु के एक साल बाद 1976 में तत्कालीन भारतीय सरकार ने उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया। आपको के. कामराज के बारे में यह जानकार हैरानी होगी कि उन्होंने एक बार प्रधानमंत्री के पद को लेने से इसलिए इंकार कर दिया था क्योकि वह कम शिक्षित थे।



शायद के. कामराज कम शिक्षित थे इसलिए वह शिक्षा के महत्व को भालीभांति समझते थे तभी तो इस सुधारवादी नेता ने शिक्षा क्षेत्र बहुत सुधार किए। उन्होंने भारत में ऐसी व्यवस्था कि कोई भी गाँव प्राथमिक स्कूल के बिना ना हो और तो ओर निरक्षरता भारत से हमेशा के लिए गायब हुए जाएं इसके लिए उन्होंने निःशुल्क तथा अनिवार्य शिक्षा भी लागू की थी।