डब्ल्यूडब्ल्यूई 2007 के बाद से रिंग के अंदर प्रोफेशनल रेसलिंग ड्राइवर की अनुमति सिर्फ अंडरटेकर और केन को देता था

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डबल्यूडबल्यूई खेल की शुरुआत बेशक अमरीका में हुई हो पर इसकी लोकप्रियता आज पुरे विश्व में है। वर्ल्ड रेसलिंग एनटरटेनमेन्ट में होने वाली फाइट को आज लगभग 36 मिलियन से अधिक लोग 320 टेलीविजन चैनलों पर या अन्य ब्रॉडकास्ट की मदद से देखते है। 2014 के आंकड़ों के अनुसार वर्ल्ड रेसलिंग एनटरटेनमेन्ट को 30.1 मिलियन अमेरिकन डॉलर का शुद्ध मुनाफा हुआ था। बात अगर भारत देश की करें तो डबल्यूडबल्यूई में खली के आ जाने की बाद इस देश में खेल की प्रति लोगप्रियता दोगुनी हो गई है।





द अंडरटेकर,केन,रॉक,जॉनसीना ट्रिपल एच डबल्यूडबल्यूई के वो खिलाडी है जिन्होंने खेल के साथ फिल्मों में आकर भी अपना नाम रोशन किया है। डबल्यू डबल्यू ई की कुश्ती की अगर बात की जाए तो 2007 के बाद से डब्ल्यूडब्ल्यूई रिंग के अंदर पिलेडरिवर अर्थात प्रोफेशनल रेसलिंग ड्राइवर की अनुमति सिर्फ अंडरटेकर और केन को देता था क्योकि काफी खतरनाक तो होता ही था साथ में खिलाडी रेसलर को अधिक शक्ति का प्रयोग करना पड़ता है। आपको बता दे पिलेडरिवर तकनीक में रेसलर अपने-अपने प्रतिद्वंदी की गर्दन को अपनी जांघों में फसा कर उसके सिर को नीचे की ओर मारता है ऐसे करते ही वह घुटना टेककर ड्राइविंग की स्थिति में आ जाता है।